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खामोशी

अब तो चुप्पी तोड़ो, ख़ामोश क्यों हो? कुछ तो बोलो, लुट रहा है देश खुलेआम, बिना रिश्वत के नहीं होता यहां कोई काम, भ्रष्टाचारियों ने डुबो दी है देश की शान, ठगा सा महसूस कर रहा है आम इंसान, हाय! किस पर करूं मैं विश्वास. दो वक़्त की रोटी मुश्किल हो गई है गरीबों की और तिजोरी भरती जा रही अमीरों की. घोटालों की घुटन में कहीं घुट न जाए देश, इसलिए अब तो मन को टटोलो जी अब तो कुछ बोलो मनमोहन जी.
उम्मीदों का आसमां बहुत बड़ा है, हकीकत का धरातल है छोटा रिश्तों की गहराई बहुत है, मगर साथ है छोटा.

दोष किसका?

देते रहे दोष औरो को, कभी परखा नहीं खुद को जलने पर दोष देते हैं आग को उसका तो काम है जलना, तुम्हें किसने कहा था उसके पास जाने को दिल टूटने का रोना रोते हो, किसने कहा था तुम्हें दिल लगाने को इस झूठी दुनिया में विश्वास की बात करते हो बताओ भला क्या मरूस्थलों में भी फूल खिलते हैं हैवानों से रखते हो उम्मीद इंसानियत की बताओ किसका है दोष उनका या तुम्हारा?

खबरों का झूठा संसार

दिन ब दिन न्यूज चैनलों की भीड़ बढ़ती ही जा रही है ये बात और है कि इस भीड़ में शामिल होने वाले नए चैनलों की सांसे ज्यादा लंबे समय तक चल नहीं पाती, और इससे पहले की लोग नए नवेले चैनल से वाकिफ हो ये दम तोड़ देते हैं... जिस रफ्तार से इनकी तादाद बढ़ रही है उतनी ही तेजी से वो अर्श से फर्श पर भी आ रहे हैं... ताश के पत्तों की तरह इनका अस्तित्व चंद महीनों में ही ढह जाता है... दरअल, वर्तमान में न्यूज चैनल चलाना किसी भी अन्य व्यवसाय की तरह ही हो गया है, ताज्जुब की बात तो ये है कि आजकल वो लोग भी चैनल खोल लेते हैं जिनका पत्रकारिता से कोई सरोकार नहीं होता... तभी तो ऐसे चैनल पर खबरों के नाम पर दिखाए जाते है फूहड़ मनोरंजन कार्यक्रम... अब अगर किसी एक चैनल ने कोई नया ट्रेंड शुरू किया तो सभी उसी का अनुसरण करने लगते हैं चाहे वो नए हों या पुराने... नए खुलने वाले चैनल तो खासतौर से नकल पर ही अपनी खबरों की दुकान चलाते हैं... आपको जानकर हैरानी होगी कि कई चैनल में काम करने वाले लोग तो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की बुनियादी चीजों से भी अवगत नहीं होते... फिर भी उंचे ओहदे पर बैठे होते हैं... ऐसा लगता है मानों खबरों की अंध...

दो पल की हस्ती

दो पल की है हस्ती कल मिट्टी में मिल जाना है जब तक है सांसे दुनिया की हर रीत निभाना है मरने पर याद करे जमाना, कुछ ऐसा कर जाना है नहीं रहेगी हस्ती मेरी तो क्या लोगों के दिल में बस जाना है दो पल की है हस्ती कल मिट्टी में मिल जाना है जीवन है जब तक अपनों से प्रीत निभाना है दिल में हो सौ दर्द मगर फिर भी मुस्कुराना है खुद जलकर मुझको दुनिया को रौशन कर जाना है

ज़िंदगी एक तलाश

ये ज़िंदगी एक तलाश है किसी को नौकरी तो किसी को प्यार की आस है खुशी की तलाश में हर कोई उदास है यकीन रखों ख़ुद पे एक दिन पूरी होगी ज़िंदगी की तलाश और हर ख़ुशी होगी तुम्हारे पास

दायरा

हम भी उड़ सकते हैं आसमान में एक मौका तो दो छू सकते हैं गगन की ऊचाइयों को पख फैलाने के लिए दायरा तो दो