दो पल की है हस्ती
कल मिट्टी में मिल जाना है
जब तक है सांसे दुनिया की हर रीत निभाना है
मरने पर याद करे जमाना, कुछ ऐसा कर जाना है
नहीं रहेगी हस्ती मेरी तो क्या
लोगों के दिल में बस जाना है
दो पल की है हस्ती
कल मिट्टी में मिल जाना है
जीवन है जब तक अपनों से प्रीत निभाना है
दिल में हो सौ दर्द मगर फिर भी मुस्कुराना है
खुद जलकर मुझको दुनिया को रौशन कर जाना है
No comments:
Post a Comment