प्यार का एहसास
लाहौर की गलियों में, इस्लामाबाद की सड़कों पर कश्मीर की वादियों में ढ़ूढ़ता फिर रहा हूं तुम्हें न जाने कहा छिपी है तू तेरी याद को दिल में संजोए हुए हूं आंखों में बसी है सूरत तुम्हारी दूर होकर भी हर पल पास रहती हो मेरे मेरी अंधेरी रातों के क्या कभी होंगे सवेरे जाने कैसा रिश्ता है तुमसे दिल समझ नहीं पाया, तो दुनिया को क्या समझाएं नहीं मिला तुम्हारा साथ तो क्या तेरे प्यार का एहसास तो है साथ.