मॉर्डनिटी की डींगे बनाम लड़के की चाहत..! डींगे हांकने के लिए होती हैं और मोह तो दिल को बाहर उछालने के लिए होता है, वो भी बल्लियों तक। अब मोह पैरों में मेंहदी लगाकर तो बैठता नहीं कि दिल में बस बैठा ही रहे। ऊपर से मोह यदि वंश बढ़ाने का हो और लड़का हो जाए, तो फिर क्या कहने! ऐसा उछाले मारना शुरू करता कि उस उछाल के क्या कहने! दिल बल्लियों उछलता है और डींगों को हांकने लायक छोड़ देता है। डिंगों की बड़ी किरकिरी होती है। अब देखिए न! वर्मा जी के यहां लड़का हुआ, तो उनका दिल बल्लियों उछला, इतना कि पहली बार जब वे दादा बनें तो भी न उछला था। भई पोता जो हुआ था। उनके वंश को बढ़ाने वाला। अब भले ही वे प्रोफेसर थे और स्त्री मुक्ति और पितृसत्तात्म्क समाज पर गजब लिखते और बोलते थे। यही हाल उनकी कार चलाने वाली पत्नी सामाजिक कार्यकर्ता मिसेज वर्मा का भी था। हालांकि ये और बात है कि जब पहले उनके बेटे को दो लड़कियां हुईं थी, तो उन्होंने नई नवेली दुल्हन की तरह ही रिएक्शन दिया था। ओह! विनीत को लड़की हुई है..! मिस्टर वर्मा और मिसेज वर्मा की लड़के और लड़की में भेद करने की डींगे हांकने वाली ही रहीं और उनका...
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