काम काम और बस काम...
इस काम ने कर दिया हैं जीना मुहाल
सुबह से रात तक बस दिखता है काम
सुकून और चैन का न लो तुम नाम
लोग कहते हैं हम बने ही करने के लिए काम
कोई पूछे उनसे क्या हम नहीं हैं इंसान?
क्या हमे नहीं चाहिए कुछ पल का आराम?
ऑफिस के सिवा भी है एक दुनिया हमारी
क्या उसकी जिम्मेदारियां निभाना नहीं हैं हमारा काम?
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