वक्त

वक्त भी क्या करवट बदलता है
आज उन गलियारों में खोमोशी का डेरा है
जहां कभी होता था खुशी का बसेरा
भीड़ की जगह एकांत है,
मन सवालों से अशांत है
हर तरफ अनिश्चितताओं को है अंधेरा
फिर भी मन में बस एक धुंधली सी उम्मीद है
कि वक्त शायद फिर ले कोई और करवट

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