सवालों की लहर
जिंदगी के समंदर में उठती है सवालों की लहर जब
मन में हलचल मच जाती है तब
देखकर हर तरफ झूठ का अंधेरा
अशांत हो जाता है मन और फिर उठ जाती है सवालों की एक लहर....
आखिर कब खत्म होगा फरेब का खेल
और जीवन में आएगी सच की रोशनी
क्या कभी होगी जीत इंसानियत की
विश्वास, सम्मान, सत्य, सहयोग की अहमियत लोग समझेंगे कब?
फिर खड़ी हो गई सवालों की एक नई लहर,
लेकिन हर बार की तरह लौट गई मन के किनारों से टकराकर
मन में हलचल मच जाती है तब
देखकर हर तरफ झूठ का अंधेरा
अशांत हो जाता है मन और फिर उठ जाती है सवालों की एक लहर....
आखिर कब खत्म होगा फरेब का खेल
और जीवन में आएगी सच की रोशनी
क्या कभी होगी जीत इंसानियत की
विश्वास, सम्मान, सत्य, सहयोग की अहमियत लोग समझेंगे कब?
फिर खड़ी हो गई सवालों की एक नई लहर,
लेकिन हर बार की तरह लौट गई मन के किनारों से टकराकर
Comments
Post a Comment