ना कोई आचार है ना कोई विचार है
जाने कैसा ये संसार है
ना सत्य की पहचान, ना है असत्य का ज्ञान
इन्हे ते बस चलानी है खबरों की दुकान
चौथे स्तंभ का मिला है जिसे दर्जा
आज खोखली हो गई उसकी ही बुनियाद है
जाने कैसा ये संसार है
ना सत्य की पहचान, ना है असत्य का ज्ञान
इन्हे ते बस चलानी है खबरों की दुकान
चौथे स्तंभ का मिला है जिसे दर्जा
आज खोखली हो गई उसकी ही बुनियाद है
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